✦ श्री सत्यनारायण वैदिक मंदिर परिसर में आपका स्वागत है। अनुभवी आचार्यों द्वारा विधि-विधान से सभी वैदिक पूजा, महायज्ञ, कल्याणी हवन एवं ज्योतिषीय गृह शांति संपन्न करवाएं। ✦ ✦ काशी और प्रयागराज के अक्षांशों पर संकलित सटीक कालचक्र ✦ ✦ मंत्रोक्त दक्षिणा युक्त सस्वर रुद्रपाठ एवं शुभ अनुष्ठान ✦ ✦ श्री सत्यनारायण वैदिक मंदिर परिसर में आपका स्वागत है। अनुभवी आचार्यों द्वारा विधि-विधान से सभी वैदिक पूजा, महायज्ञ, कल्याणी हवन एवं ज्योतिषीय गृह शांति संपन्न करवाएं। ✦ ✦ काशी और प्रयागराज के अक्षांशों पर संकलित सटीक कालचक्र ✦ ✦ मंत्रोक्त दक्षिणा युक्त सस्वर रुद्रपाठ एवं शुभ अनुष्ठान ✦

गृह शांति एवं सकारात्मकता के लिए प्राचीन वास्तु नियम

वास्तु शास्त्र वास्तुकला और स्थापत्य का वह सनातन विज्ञान है, जो पृथ्वी के चुंबकीय बल व सौर ऊर्जा तरंगों को घर या व्यापारिक स्थल में संतुलित करने के लिए पंचमहाभूतों (भूमि, जल, अग्नि, वायु और आकाश) की दिशाओं का शास्त्रीय सामंजस्य स्थापित करता है। मुख्य शास्त्रीय सिद्धांत: १. गृह प्रवेश: घर का मुख्य द्वार सदैव ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में होना परम कल्याणकारी है, जो प्रकाश के साथ सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। २. गृह देवस्थान (पूजा घर): निवास स्थल पर पूजा स्थल सदैव ईशान कोण में होना सर्वश्रेष्ठ है। कपूर व घी का दीप जलाकर पूर्वाभिमुख बैठकर पूजन व ध्यान करें। ३. जल प्रवाह: जल संग्रह स्थान या जल नलिकाएं उत्तर दिशा में होनी चाहिए, ताकि दक्षिण-पूर्व के आग्नेय कोण (अग्नि दिशा) से परस्पर अवरोध न हो।